पतंजलि योगपीठ के महामंत्री और बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को करीब 15 साल पुराने फर्जी पासपोर्ट मामले में बड़ी राहत मिली है। देहरादून की विशेष सीबीआई अदालत ने सोमवार को मामले पर फैसला सुनाते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहे मामले का कानूनी तौर पर पटाक्षेप हो गया है।
आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ आरोप था कि उन्होंने कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भारतीय पासपोर्ट हासिल किया। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने की थी। जांच के दौरान उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के खुर्जा स्थित श्री राधा कृष्ण संस्कृत महाविद्यालय से जुड़े शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में आए थे।
इस मामले की शुरुआत अप्रैल 2011 में मिली शिकायत से हुई थी। प्रारंभिक जांच के बाद सीबीआई ने जुलाई 2011 में एफआईआर दर्ज की। इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने के साथ पासपोर्ट अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी।
जांच एजेंसी ने बाद में मामले की जांच पूरी कर वर्ष 2012 में अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
