जिला कारागार देहरादून में बंदियों के मानवाधिकार संरक्षण और कारागार प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखण्ड मानवाधिकार आयोग ने एक स्वतंत्र निगरानी समिति का गठन किया है। इस समिति में वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी हर्ष निधि शर्मा को मानवाधिकार विशेषज्ञ के रूप में शामिल किया गया है।
मानवाधिकार आयोग के वाद संख्या 392/35/7/2021 के निर्णय के आधार पर 27 मार्च 2025 को दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए यह समिति बनाई गई है।
समिति में जिला कारागार देहरादून की जेलर और समाजसेवी सुद्धोवाला श्रीमती गिरबाला जुयाल, चिकित्साधिकारी जिला कारागार देहरादून तथा मानवाधिकार विशेषज्ञ हर्ष निधि शर्मा जैसे प्रतिष्ठित सदस्य शामिल हैं।
स्वतंत्र निगरानी समिति का मुख्य उद्देश्य कारागार में निरूद्ध बंदियों के अधिकारों की रक्षा करना, जेल नियमों का पालन करवाना, बंदियों द्वारा की जाने वाली शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित करना है। साथ ही समिति कारागार में बंदियों के प्रति उत्पीड़न, मारपीट या प्रताड़ना की घटनाओं की जांच और रोकथाम में भी सक्रिय भूमिका निभाएगी।
समिति द्वारा प्राप्त शिकायतों की जांच के बाद उसकी रिपोर्ट को गोपनीयता के साथ उच्च अधिकारियों को अग्रेषित किया जाएगा ताकि उचित कार्यवाही हो सके। इस पहल से देहरादून के जिला कारागार में बंदियों के प्रति मानवतावादी और संवेदनशील प्रशासन स्थापित करने में मदद मिलेगी।
वरिष्ठ अधीक्षक जिला कारागार ने बताया कि इस समिति के गठन से जेल प्रशासन में पारदर्शिता आयेगी और बंदियों के मूल मानवाधिकारों का संरक्षण होगा। हर्ष निधि शर्मा के ज्ञान और अनुभव से कारागार में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव होने की उम्मीद है।
यह निगरानी समिति नियमित रूप से कारागार का निरीक्षण करेगी और बंदियों के हित में आवश्यक कदम उठाएगी ताकि एक सम्मानजनक और सुरक्षित कारागार वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
