असम में 2026 के पहले चार महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कड़ा रुख अपना रही है. राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि राज्य में चुनावी लड़ाई जीतने के लिए, भाजपा 20 से अधिक मौजूदा विधायकों को टिकट देने से इनकार कर सकती है.
यह अटकलें जोरों पर हैं कि लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की तैयारी में जुटे 63 मौजूदा भाजपा विधायकों में से 20 से ज्यादा को टिकट नहीं दिया जा सकता. यह बात अब और स्पष्ट होती जा रही है. असम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने शुरुआत में इस स्पष्ट संकेत की ओर इशारा किया था, जिसकी अब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की है. दोनों नेताओं ने 2026 में मजबूत चुनावी प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए कड़े फैसले लेने के लिए पार्टी की तत्परता पर जोर दिया है.
असम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने हाल ही में कहा था कि, टिकट के मामले में भाजपा किसी का मुंह नहीं देखती. इसी भावना को दोहराते हुए, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार रात स्पष्ट रूप से कहा, सभी विधायकों को टिकट नहीं मिलेगा. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि, असम विधानसभा चुनाव में कुछ भाजपा नेता ऐसे होंगे जो खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला करेंगे और कुछ का टिकट काट देंगे. उन्होंने बातों ही बातों में नए चेहरों को आगे लाने की बात कही. उन्होंने कहा कि, कोई भी नए चेहरों का रास्ता नहीं रोक सकता है.
यह रणनीतिक कदम राज्य में तीसरी बार सरकार बनाने के लिए भाजपा की आक्रामक तैयारियों का हिस्सा है. पार्टी के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि राज्य भाजपा अपने 2026 के चुनावी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपने मौजूदा विधायकों की एक बड़ी संख्या की ‘बलिदान’ करने के लिए तैयार है. यह रणनीति कथित तौर पर गुवाहाटी के पास सोनापुर में आयोजित भाजपा की हाल ही में हुई दो दिवसीय ‘चिंतन बैठक’ (मंथन सत्र) के दौरान चर्चा का एक प्रमुख विषय थी.
