दिल्ली : जगदीप धनखड़ ने उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. ऊपरी तौर पर इसका कारण स्वास्थ्य बताया गया है, लेकिन विपक्ष इसे स्वीकारने को तैयार नहीं है. उनका कहना है कि अंदरखाने कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी वजह से उन्होंने त्याग पत्र दे दिया. धनखड़ ने अगस्त 2022 में उप राष्ट्रपति का पद संभाला था. उनका कार्यकाल 2027 में खत्म होना था. पूरे मामले पर विपक्ष ने क्या कहा, पढ़ें.
एक समय था जब विपक्ष जगदीप धनखड़ के इस्तीफे लेने पर अड़ा था, और अब जबकि वह इस्तीफा दे चुके हैं, तो पूरा विपक्ष उन्हें अपने इस्तीफे पर पुनर्विचार करने को कह रहा है. वैसे यह बात अब तक किसी को पता नहीं है कि अचानक ही उन्होंने इस्तीफा क्यों दे दिया. सोमवार शाम को साढ़े चार बजे वह बिजनेस एडवाजरी कमेटी की बैठक लेने वाले थे, वह पहुंचे भी थे, लेकिन सरकार की ओर से सीनियर व्यक्ति के नहीं पहुंचने पर उन्होंने बैठक टाल दी. माना जा रहा है कि इससे धनखड़ आहत थे. हालांकि, इसकी किसी ने भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि वह बैठक में इसलिए नहीं पहुंच सके, क्योंकि वह दूसरी बैठक में व्यस्त थे.
उप राष्ट्रपति के इस्तीफे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है, उन्होंने क्यों इस्तीफा दिया. खड़गे ने कहा कि उनके त्यागपत्र की वजह सिर्फ सरकार जानती है, वही बता सकती है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति का अचानक इस्तीफा जितना चौंकाने वाला है, उतना ही अकल्पनीय भी है. इसमें कोई संदेह नहीं कि धनखड़ को अपने स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी. लेकिन स्पष्ट रूप से उनके अप्रत्याशित इस्तीफे के पीछे जो दिख रहा है, उससे कहीं अधिक कुछ है. उन्होंने कल बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक तय की थी… उन्हें न्यायपालिका से संबंधित कुछ बड़ी घोषणाएं भी करनी थीं.”
मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि सोमवार शाम साढ़े चार बजे बिजनेस एडवायजरी कमेटी की बैठक थी. इसमें सरकार की ओर से एल मुरुगन मौजूद थे. वह राज्य मंत्री हैं. ऐसा कहा जाता है कि धनखड़ ने इस बैठक को दोबारा आयोजित करने को कहा. उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि वे जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू की मौजूदगी चाहते थे. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बताया कि इन दोनों नेताओं की गैर मौजूदगी से धनखड़ थोड़े असहज थे.
आपको बता दें कि धनखड़ से पहले वीवी गिरी और आर वेंकट रमण के बाद उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने वाले वह तीसरे व्यक्ति हैं. हालांकि, पहले दोनों व्यक्तियों ने इस्तीफा देकर राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ा था.
