उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों को हवाला देते हुए सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू है और संविधान के अनुच्छेद 67 (A) के अनुसार दिया गया है. ताजा जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपराष्ट्रपति का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. वहीं, पीएम मोदी ने उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की है.
संसद के मानसून सत्र के बीच धनखड़ ने अपने इस्तीफे की घोषणा की. राज्यसभा के सभापति धनखड़ ने सोमवार को संसद का सत्र शुरू होने के बाद कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता की और चुपचाप सदन से चले गए थे.
74 वर्षीय जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी और उनका कार्यकाल 2027 तक था. हृदय संबंधी बीमारियों के बाद धनखड़ को इसी साल मार्च में एम्स-दिल्ली में भर्ती कराया गया था और चार दिनों तक उनका इलाज चला था. जहां उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित एक पत्र में जगदीप धनखड़ ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री और संसद सदस्यों के सहयोग के लिए उनके प्रति गहरा आभार व्यक्त किया. धनखड़ ने पत्र में कहा, “स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सा सलाह का पालन करने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67 (A) के तहत, तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं. मैं भारत की राष्ट्रपति के प्रति उनके अटूट समर्थन और मेरे कार्यकाल के दौरान हमारे बीच बने सुखद एवं अद्भुत कार्य संबंधों के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं.
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, “मैं उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करता हूं. मैं दुखी हूं, क्योंकि मेरे उनके साथ बहुत अच्छे संबंध हैं. मैं उन्हें 30-40 वर्षों से जानता हूं. हम एक-दूसरे के साथ थे. हम कई मामलों में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हुए हैं. हमारे बीच एक अनोखा रिश्ता है. मैंने हमेशा उनका सम्मान किया है, और उन्होंने भी मेरा सम्मान किया है.”
सिब्बल ने कहा, “मैं आशा करता हूं कि वे स्वस्थ रहें और दीर्घायु हों, और मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं. हमारे राजनीतिक विचारों या विचारों को लेकर हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर, हमारे बीच एक बहुत ही मजबूत रिश्ता था. जब भी मुझे सदन में बोलने के लिए समय चाहिए होता था, मैं उनसे उनके कक्ष में व्यक्तिगत रूप से मिलता था, और उन्होंने मुझे कभी मना नहीं किया, और मुझे स्वतंत्र सांसदों को मिलने वाले समय से थोड़ा ज्यादा समय दिया.”
